सांस्कृतिक समागम” के नाम पर आदिवासी समाज को भ्रमित एवं बरगलाने की साजिश कर रही है RSS और भाजपा - अमरजीत भगत

कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने RSS और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 'सांस्कृतिक समागम' के बहाने आदिवासी समाज को जानबूझकर भ्रमित और बरगलाने की साजिश रची जा रही है।
24/05/2026
रायपुर, छत्तीसगढ़
पूर्व मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन एवं सदस्य केंद्रीय एडवायजरी कमिटी श्री अमरजीत भगत ने कहा है कि देश में आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर लगातार हमले बढ़ते जा रहे हैं। एक तरफ आदिवासियों के नाम पर “सांस्कृतिक समागम” आयोजित किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ आदिवासी समाज को उसकी जमीन, जंगल और संसाधनों से बेदखल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में बड़े पैमाने पर जंगल काटे जा रहे हैं और खनन परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी समाज को विस्थापन की ओर धकेला जा रहा है। हसदेव अरण्य से उदयपुर रामगढ़ तक लाखों पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया चल रही है। सरगुजा क्षेत्र के मदननगर, मानपुर, खोटिया, बोझा, चंद्रपुर, खड़गवां, कल्याणपुर, दुरती सहित अनेक गांवों में पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची की भावना की अनदेखी करते हुए कोयला खदानों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
श्री भगत ने कहा कि नारायणपुर जिले के धनोरा में लौह अयस्क, जशपुर जिले के तुमसा-चेता में हीरा, बलौदाबाजार के सोनाखान क्षेत्र में सोना तथा अबूझमाड़ क्षेत्र में लौह अयस्क खदानों की तैयारी की जा रही है। रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर जंगल और गांव प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जल-जंगल-जमीन को बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है। आदिवासी समाज की पुश्तैनी जमीनों पर कब्जा कर प्राकृतिक संसाधनों का निजीकरण किया जा रहा है।
श्री अमरजीत भगत ने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में भी यही स्थिति है। गुजरात, राजस्थान, हरियाणा से दिल्ली तक फैली अरावली पर्वतमाला खनन और पर्यावरणीय विनाश का सामना कर रही है। मध्यप्रदेश के सिंगरौली में जंगल कटान जारी है। निकोबार में बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण पर्यावरण और आदिवासी अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। उड़ीसा के सिजीमाली और कुटामली क्षेत्रों में स्थानीय विरोध के बावजूद खनन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों के जरिए आदिवासी समाज की संवैधानिक पहचान और अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। अनुसूचित जनजाति की संवैधानिक स्थिति से छेड़छाड़ का हर प्रयास आदिवासी समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
श्री भगत ने परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जनसंख्या आधारित परिसीमन के जरिए संसद और विधानसभाओं में आदिवासी प्रतिनिधित्व को कम करने की आशंका बढ़ रही है। यह लोकतंत्र में आदिवासी आवाज को कमजोर करने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई दया या कृपा नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। आदिवासी आरक्षण और राजनीतिक हिस्सेदारी को कमजोर करना संविधान की मूल भावना पर हमला है।
श्री अमरजीत भगत ने कहा कि आज आदिवासी समाज को धर्म और संस्कृति के नाम पर बांटने की राजनीति की जा रही है, जबकि असली मुद्दे — विस्थापन, बेरोजगारी, वनाधिकार, शिक्षा और जल संकट — लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रुपया कमजोर हो रहा है, महंगाई बढ़ रही है, किसान खाद और सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सांस्कृतिक आयोजनों का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मांदर की थाप तभी गूंजेगी जब आदिवासी समाज सुरक्षित होगा, जंगल बचेंगे, नदियां बहेंगी और खेतों में फसल होगी। भूखे और विस्थापित आदिवासी समाज के बीच केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से वास्तविक समस्याएं हल नहीं होंगी।
श्री भगत ने सभी आदिवासी समुदायों से एकजुट होकर जल-जंगल-जमीन, पेसा कानून, पांचवीं अनुसूची, वनाधिकार कानून, आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष को मजबूत करने की अपील की।
आज की प्रेस वार्ता में आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश संगठन प्रभारी कुलदीप ध्रुव जी,कुंदन ठाकुर,पप्पू बघेल,रमेश ठाकुर,दीपेश कृपाल,मनोज साक्षी,गोपेश ध्रुव,सजल नाग,मनोज सोनकर,उपस्थित रहे
